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जिम्बाब्वे में फेरी पलटने से 72 लोगों की मौत, इनमें 18 बच्चे भी शामिल, 90 की जगह 153 लोगों को ले जा रही थी नाव

 Written By: Shakti Singh
 Published : Aug 16, 2026 08:50 am IST,  Updated : Aug 16, 2026 08:50 am IST

अनुमान लगाया जा रहा है कि बोट में 153 लोग सवार थे, जबकि इसकी क्षमता सिर्फ 90 यात्रियों को ले जाने की थी। अब तक 72 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 77 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है।

Zimbabwe Lake- India TV Hindi
जिम्बाब्वे नाव हादसा Image Source : AP

जिम्बाब्वे में इस हफ्ते करीबा झील पर एक ओवरलोडेड फेरी पलटने से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जिसमें अठारह बच्चे भी शामिल हैं। शनिवार को रेस्क्यू टीम ने कई अन्य यात्रियों की लाशें बरामद कीं। इसके बाद पुलिस ने 72 मौतों की पुष्टि की। यह फेरी मंगलवार को तेज लहरों में पलट गई थी। पुलिस ने कहा कि 26 और लाशें बरामद की गई हैं, जिससे मरने वालों की संख्या 72 हो गई है। इसी महीने की शुरुआत में इंडोनेशिया में भी बोट में आग लगने से बड़ा हादसा हुआ था

यह पुरानी फेरी करीबा शहर से देश के उत्तर-पश्चिम में ग्रामीण और मछली पकड़ने वाले समुदायों की ओर जा रही थी, जहां सड़कें खराब हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट कम है। अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि कितने लोग सवार थे या कितने लापता हैं। यह हादसा मंगलवार को हुआ था। हादसे का शिकार हुई नाव का संचालन एक सरकारी एजेंसी कर रही थी। इस नौका का इस्तेमाल करिबा झील के आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को तट पर स्थित करिबा शहर तक ले जाने के लिए किया जाता है।

77 लोगों का रेस्क्यू

अनुमान है कि यात्रियों की संख्या 153 तक है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि फेरी की क्षमता 90 है। जिम्बाब्वे की डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी ने कहा है कि 77 लोगों को बचाया गया। अधिकारी ने बताया कि 77 लोगों को बचाकर झील के एक छोटे द्वीप पर पहुंचा दिया गया और उन्हें वापस लाने के लिए नौकाएं भेजी गईं। अधिकारियों ने शुरू में कहा था कि सवार बच्चों की संख्या पता नहीं थी, क्योंकि टिकट लेने की उम्र से कम उम्र के बच्चों को यात्रियों के अनुमान में शामिल नहीं किया गया था। बाद में जारी पुलिस लिस्ट से पता चला कि मरने वाले 16 बच्चे 10 साल या उससे कम उम्र के थे, जिनमें सबसे छोटा सिर्फ एक साल का था।

सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है करीबा

करिबा दुनिया की सबसे बड़ी इंसानों की बनाई झील है, जिसे 1950 के दशक के आखिर और 1960 के दशक की शुरुआत में जम्बेजी नदी पर डैम बनाकर बनाया गया था। यह 200 किलोमीटर से ज्यादा फैली हुई है और कुछ जगहों पर 40 किलोमीटर तक चौड़ी है। जिम्बाब्वे और जाम्बिया इस झील को शेयर करते हैं, और उनका बॉर्डर इसके बीच से होकर गुजरता है। (इनपुट-एपी)

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